क्या 24 गुण काफ़ी हैं? (और स्कोर के दूसरे सवाल)
पहले सीधा जवाब: हाँ, 36 में से 24 गुण चलने लायक स्कोर है। यह पारंपरिक न्यूनतम 18 से ऊपर है और "चलने लायक" श्रेणी में आता है। कुछ साइटें 24 को "अच्छा" कहती हैं और कुछ "अच्छा" 25 से शुरू करती हैं। जो भी हो, 24 से किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं है।
इस पन्ने में वही सवाल हैं जो लोग असल में खोजते हैं या घर में पूछते हैं। अगर आठों भागों की पूरी जानकारी पहले चाहिए, तो पढ़ें 36 गुण, स्कोर की तरह समझिए।
कितने गुण चाहिए शादी के लिए? (Kitne guna chahiye shaadi ke liye?)
आम तौर पर 18 या उससे ज़्यादा चाहिए, जो 36 का आधा है। AstroCalc स्कोर को इस तरह पढ़ता है:
| स्कोर | सीधा मतलब |
|---|---|
| 18 से कम | सामान्य न्यूनतम से कम। पंडित जी से बात करें। |
| 18 से 24 | चलने लायक मिलान। |
| 25 से 32 | अच्छा मिलान। |
| 33 से 36 | उत्कृष्ट मिलान। |
शास्त्र में ऐसा कोई नियम नहीं है कि "इतने गुण ही चाहिए, इससे एक भी कम नहीं"। 18 एक व्यावहारिक सीमा है, जिसे परिवार लंबे समय से मानते आए हैं।
24 गुण मिलना ठीक है? (24 guna milna theek hai?)
हाँ। 24 न्यूनतम सीमा से काफ़ी ऊपर है। कुल जोड़ से ज़्यादा ज़रूरी यह है कि अंक कहाँ कटे। जिस 24 में वर्ण और वश्य (कुल 3 अंक) कटे हों, वह उस 24 से बिल्कुल अलग बात है जिसमें नाड़ी के 8 अंक कटे हों। सिर्फ़ कुल जोड़ नहीं, अलग-अलग भाग देखिए।
18 से कम गुण हों तो क्या शादी नहीं हो सकती? (18 se kam guna)
ऐसा नहीं है। 18 से कम होने पर परंपरा कहती है "ध्यान से देखिए", यह नहीं कि "रुक जाइए"। परिवार आमतौर पर पंडित जी से पूछते हैं कि कौन-से भाग कम हैं और कोई परिहार लागू होता है या नहीं। नाड़ी और भकूट के कई "शून्य" शास्त्रीय नियमों से कट जाते हैं, जिससे कुल स्कोर काफ़ी बढ़ सकता है। मुफ़्त जाँच में परिहार के बाद का स्कोर देखिए।
36 में से 36 मिलें तो क्या सब कुछ बढ़िया होगा? (36 perfect?)
ऊँचा स्कोर बताता है कि दो चंद्रमा अच्छी तरह मेल खाते हैं। यह सातवें भाव, शुक्र, जीवन के चरणों के समय या दोनों के बात करने के तरीके के बारे में कुछ नहीं कहता। बिना बातचीत वाला 34, खुलकर बात करने वाले 22 से ज़्यादा मुश्किल में पड़ सकता है। देखें कुंडली मिलान: स्कोर के पार।
अलग-अलग वेबसाइट अलग स्कोर क्यों दिखाती हैं? (Alag score kyun?)
उलझन की यह सबसे आम वजह है, और ज़्यादातर कुछ छोटे चुनावों पर टिकी होती है:
- परिहार। कुछ साइटें नाड़ी या भकूट का कच्चा "0" ही छाप देती हैं। दूसरी (जैसे AstroCalc) शास्त्रीय अपवाद लागू होने पर अंक वापस दे देती हैं।
- तारा और गण। छपी हुई तालिकाओं में कुछ जोड़ों पर एक-दो अंक का फ़र्क़ होता है, जैसे देव के साथ मनुष्य को कितने अंक मिलें।
- जन्म समय और स्थान। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। कुछ घंटे का फ़र्क़ आमतौर पर कुछ नहीं बदलता, पर जब चंद्रमा राशि या नक्षत्र की सीमा के पास हो तो बदल सकता है।
- गणना की सेटिंग। साइटें थोड़ा अलग अयनांश (राशिचक्र का संदर्भ बिंदु) लेती हैं, जिससे सीमा के पास का चंद्रमा खिसक सकता है।
अगर दो साइटों में कुछ अंकों का फ़र्क़ आए, तो कुल जोड़ के बजाय अलग-अलग भाग मिलाइए। जिस भाग में फ़र्क़ है, वही बताता है कि कौन-सा चुनाव ज़िम्मेदार है।
नाड़ी या भकूट शून्य आए तो क्या करें? (Nadi ya Bhakoot zero aaye to?)
शांत रहिए, और पहले परिहार देखिए। दोनों आम हैं: लगभग हर तीन में से एक जोड़ी की नाड़ी एक होती है, और भकूट की दोष वाली दूरियाँ भी अक्सर आती हैं। दोनों के पहचाने हुए अपवाद हैं। पढ़ें नाड़ी दोष: क्या है और कब कटता है और भकूट दोष: चंद्र राशि की दूरी का नियम। फिर पंडित जी से पुष्टि करवा लीजिए।
मांगलिक हो तो क्या गुण कम हो जाते हैं? (Manglik hai to guna?)
नहीं। मांगलिक स्थिति (मंगल की स्थिति) 36 गुणों का हिस्सा नहीं है। इसकी जाँच अलग से होती है। कोई जोड़ा 30 गुण लाकर भी मांगलिक सवाल पर विचार कर सकता है, या 22 गुण लाकर भी बिना किसी मांगलिक सवाल के हो सकता है। मुफ़्त जाँच दोनों दिखाती है। विस्तार के लिए पढ़ें मांगलिक दोष।
जन्म समय पता नहीं, थोड़ा ऊपर-नीचे हो तो? (Birth time pata nahi)
गुण मिलान में सिर्फ़ चंद्रमा मायने रखता है, और चंद्रमा धीरे चलता है। समय एक-दो घंटे ऊपर-नीचे हो तो नतीजा आमतौर पर वही रहता है। अगर कई घंटों का संदेह हो, या जन्म आधी रात के आसपास हुआ हो, तो घर वालों से सबसे सही दर्ज समय पूछिए (अस्पताल के कागज़ आमतौर पर सबसे भरोसेमंद होते हैं)। पंडित जी कभी-कभी उस दिन का पंचांग देखकर भी पुष्टि कर सकते हैं।
लव मैरिज में भी कुंडली मिलान ज़रूरी है? (Love marriage mein?)
यह परिवार पर निर्भर है, कुंडली पर नहीं। कई जोड़े माता-पिता को निश्चिंत करने के लिए स्कोर देख लेते हैं और फिर खुद तय करते हैं कि उसे कितना महत्व देना है। यह एक परंपरा है, और आप इसे रोक की जगह जानकारी की तरह भी ले सकते हैं।
स्कोर के बाद पंडित जी और क्या देखते हैं? (Score ke baad pandit?)
आमतौर पर तीन चीज़ें और: दोनों कुंडलियों में मांगलिक संतुलन, हर कुंडली में सातवाँ भाव और शुक्र, और हर व्यक्ति की चल रही दशा (जीवन के चरणों का समय)। स्कोर पहला कदम है, और ये अगले कदम हैं। कुंडली मिलान: स्कोर के पार में सब कुछ मिलेगा।
अपना मिलान मुफ़्त जाँचें
दोनों की जन्म जानकारी डालिए और सीधी भाषा में कुल स्कोर, आठों भाग, लागू होने वाले परिहार और दोनों की मांगलिक स्थिति देखिए। माता-पिता को व्हाट्सऐप पर भेजना भी आसान है।
30 सेकंड में अपना मिलान मुफ़्त जाँचें
संबंधित अध्याय: 36 गुण, स्कोर की तरह समझिए · नाड़ी दोष · भकूट दोष · मांगलिक दोष · कुंडली मिलान